क्राइम संवाददाता बिहार के खगड़िया में एक एनजीओ द्वारा लगाए गए नसबंदी शिवि‍र में महिलाओं को बिना एनेस्थीसिया दिए (सुन्न किए) बंध्‍याकरण कर दिया गया। महिलाएं दर्द से चीखती रहीं। उनका मुंह बंद कर एक के बाद कई महिलाओं का ऑपरेशन किया गया। बंध्याकरण के दौरान 11 नवंबर को परबत्ता और 12 नवंबर को अलौली सीएचसी में बरती गई लापरवाही का अब परत दर परत खुल रहा है। दोनों जगहों पर मानवता को ताक पर रखकर, तार-तारकर संबंधित एनजीओ और स्वास्थ्य विभाग ने बंध्याकरण कार्य को अंजाम दिया। परबत्ता में 30 बेड खाली रहने के बाद महिलाओं को सूई लगाने के उपरांत फर्श पर भेड़-बकरी की तरह लिटा दिया गया। जबकि अलौली में कुमारी प्रतिमा का सुन्न करने वाली सूई लगाए बगैर बंध्याकरण कर दिया गया। इन घटनाओं के बाद पूरे सिस्टम की पोल खुल गई है। सिस्टम कटघरे में है। मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम आलोक रंजन घोष के निर्देश पर सिविल सर्जन ने जांच को अंजाम दिया है। उनकी जांच में भी लापरवाही का पर्दाफाश हुआ है। सिविल सर्जन ने शुक्रवार को बताया कि तत्काल संबंधित एनजीओ एफआरएचएसआइ और ग्लोबल डवलपमेंट इनिसिएटिव, दरभंगा, की ओर से आपरेशन नहीं किया जाएगा। तत्काल स्टे लग गया है। सिविल सर्जन डा. अमरनाथ झा के अनुसार दोनों एनजीओ के अनुबंध को रद करने की अनुशंसा की गई है।इधर बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि इसकी उच्च स्तरीय व संपूर्ण जांच हो, नहीं तो विधान परिषद में मामला उठाएंगे। खगड़िया सांसद चौधरी महबूब अली कैसर ने सूबे के उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। इधर परबत्ता के जदयू विधायक डा. संजीव कुमार ने भी कहा है कि, लापरवाही बरती गई है। जो भी दोषी होंगे उन पर कार्रवाई होगी।प्रतिमा ने फिर खोली पोलइधर कुमारी प्रतिमा ने फिर सिस्टम की पोल खोल दी है। डीएम के निर्देश पर बीते बुधवार को खगड़िया सिविल सर्जन जांच को अलौली पहुंचे थे। उनके साथ अलौली सीएचसी के प्रभारी डा. मनीष कुमार भी थे। दोनों ने प्रतिमा से मुलाकात के बाद कहा कि, पेशेंट ठीक है। वहीं कुमारी प्रतिमा ने शुक्रवार को प्रिंट मीडिय एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया को बताया कि, बंध्याकरण के दौरान अलौली सीएचसी में अमानवीयता का परिचय डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों ने दिया। उन्होंने कहा कि आपरेशन के बाद उन्हें मात्र दो पत्ती टेबलेट दिया गया। एक दर्द की है और एक बिटामीन की है। जब दर्द निवारक सूई की मांग की तो एक पुर्जा थमा दिया गया और कहा गया कि बाहर से दवा खरीद लीजिए। बाहर से चार हजार की सूई दवा खरीदी है। दर्द अब तक ठीक नहीं हुआ है। अंदर जख्म जैसा महसूस होता है। दवा-सूई लेते हैं, तो कुछ देर आराम रहता है। मालूम हो कि प्रतिमा ने ही आरोप लगाया है कि सुन्न करने वाली सूई दिए बगैर उनका बंध्याकरण कर दिया गया। वैसे सूत्रों के अनुसार इस तरह के सात पेशेंट हैं। लेकिन प्रतिमा ही खुलकर सामने आई है। खगड़िया के सिविल सर्जन डा. अमरनाथ झा ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि अलौली में प्रोटोकाल का उल्लंघन हुआ है। प्रतिमा की स्थिति अगर ठीक नहीं थी, तो आपरेशन नहीं करना चाहिए। उन्हें जिला अस्पताल भेजना चाहिए था। परबत्ता में बीसीएम और तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. हरिनंदन शर्मा की लापरवाही सामने आई है। डीएम को जांच रिपोर्ट भेजी जा रही है। सिविल सर्जन डा. अमरनाथ झा ने कहा है कि अलौली सीएचसी में बंध्याकरण को पहुंचे चिकित्सक का अपराध यह था कि वे येन केन प्रकारेण ऑपरेशन कर निकल जाना चाहते थे। या उनके माइंडसेट में था। इसे उन्होंने अंजाम भी दिया। अपराध के अनुसार उन्हें दंड मिलना चाहिए।महागठबंधन की सरकार में अदभूत कार्य हो रहे हैं। बिना सुन्न किए जाने वाले सूई दिए बंध्याकरण कर दिया जाता है। बिहार सरकार कोमा में चली गई है। – सम्राट चौधरी, बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष।

Gurudev kumar

Editor-in-chief

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